नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

भोपाल [ महा मीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के एक मामले में आरोपी लोक सेवक को नियमित जमानत देते हुए कहा है कि अभियोजन की स्वीकृति देने में हुई देरी का नुकसान किसी नागरिक को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करके नहीं पहुंचाया जा सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने यह आदेश उस मामले में पारित किया जिसमें आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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