पूजा और पाठ के लिए होलाष्टक का समय शुभ

पूजा और पाठ के लिए होलाष्टक का समय शुभ

भोपाल [महामीडिया] आमतौर पर होलाष्‍टक 8 दिनों का होता है लेकिन कई बार 9 दिनों का हो सकता। इन आठ दिनों में किसी भी शुभ काम को करना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। होलाष्टक समय अवधि में मांगलिक कार्य निषेद माने गये हैं।तप करने के लिए होलाष्टक का समय बहुत ही शुभ माना जाता है। होलाष्टक प्रारंभ होते ही होलिका दहन वाले स्थान की गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती है। साथ ही वहाँ पर होलिका का डंडा लगा दिया जाता है जिनमें एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है। होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है। रंग और गुलाल के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है सनातन धर्म में दैनिक पूजा एक केंद्रीय अभ्यास है जो व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में गहन महत्व रखता है।यह केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि एक समग्र आध्यात्मिक अनुशासन है जो व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ता है और जीवन को व्यवस्थित तथा संतुलित बनाता है । पूजा का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति नहीं है, बल्कि मन की शुद्धि, आंतरिक शांति और अंततः आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर होना है । 

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