भारत का मसाला बाजार 13 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान
भोपाल [महा मीडिया]
मसाले का घरेलू बाजार 2025 के 5.15 अरब डॉलर से बढकर 2034 तक 13 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।भोजन के लिए विभिन्न रूपों में मसाले उपलब्ध हैं और इसमें साबुत और पिसे हुए एकल मसालों की बाजार हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है। वहीं पूरे मसाला बाजार का लगभग 60-80 प्रतिशत कारोबार अनौपचारिक क्षेत्र में है। भारत लगभग 75 प्रकार के मसालों का उत्पादन करता है लेकिन उनमें से अब तक केवल 45 मसालों के लिए मानक तय किए हैं। अभी तक ‘कोकम और वनीला’ जैसे कुछ मसालों के लिए मानक तय नहीं किए हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक उपभोक्ता और निर्यातक है जो सूचीबद्ध 109 किस्मों में से लगभग 75 किस्में उगाता है। वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी काफी मजबूत है जो दुनिया के 200 से अधिक देशों को निर्यात करता है। वित्त वर्ष 2024-25 में मसाला निर्यात रिकॉर्ड लगभग ₹37,200 करोड़ तक पहुँच गया था। उत्तर भारत 30.0% के साथ रीजनल मार्केट में सबसे आगे है जिसकी वजह प्रति व्यक्ति ज़्यादा मसालों की खपत और पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की मसालेदार खाने की परंपरा है। दक्षिण भारत 29.0% के साथ दूसरे नंबर पर है, जिसे केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में इलायची, काली मिर्च और हल्दी जैसे प्रीमियम मसालों की साल भर खेती से सपोर्ट मिलता है।