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म.प्र.बंधुआ मजदूरी अधिनयम के परिपालन में पिछड़ा
भोपाल [ महा मीडिया] बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 के परिपालन और क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई और पिछड़ापन (चुनौतियां) देखने को मिलता है। यद्यपि सरकारी रिकॉर्ड कई बार इस प्रथा को समाप्त या शून्य दर्शाते हैं, लेकिन व्यावहारिक क्रियान्वयन में आज भी कई कमियां मौजूद हैं।सरकारी रिकॉर्ड में म.प्र. में बंधुआ मजदूरी जीरो है पर 7 महीने में सामने आए 5 मामले अलग कहानी बयां कर रहे हैं। रायसेन के बाबई गांव के मनोज रावत ने 15 साल पहले 18 हजार रुपए उधार लिए थे।15 साल तक 3,500 रुपए मासिक मजदूरी कराने के बाद भी 1.5 लाख रुपए का कर्ज बताया गया। शिकायत की जांच में प्रशासन ने इसे बंधुआ मजदूरी के बजाय कम मजदूरी का मामला माना।ऐसे में पीड़ितों को न रिलीज सर्टिफिकेट मिल रहा है न सरकारी सहायता। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मई 2026 में संशोधित एसओपी जारी की थी। श्रमायुक्त कार्यालय ने 15 जुलाई 2026 को कलेक्टर्स व एसपी को इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे।