कार्तिक मास में नदी स्नान की परंपरा

कार्तिक मास में नदी स्नान की परंपरा

भोपाल [ महा मीडिया] कार्तिक मास में पवित्र नदी स्नान का अत्यंत विशेष और पुण्यदायी महत्व माना गया है। कार्तिक मास में रोज सूर्योदय से पहले (लगभग सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच, तारों की छांव में) स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है।इस महीने गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी, सरोवर या तालाब में स्नान करना चाहिए। यदि किसी नदी या जलाशय पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। बुजुर्गों, बच्चों या बीमार व्यक्तियों के लिए ठंडे पानी से स्नान करना अनिवार्य नहीं है सामान्य या गुनगुने पानी का उपयोग कर सकते हैं। कार्तिक मास में स्नान करने से पिछले जन्मों और इस जन्म के पापों का नाश होता है।  इस पूरे महीने भगवान विष्णु जल में ही निवास करते हैं, इसलिए स्नान के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या अन्य इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए। पूरे महीने के अलावा रमा एकादशी, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदी स्नान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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