प्रकृति की उपासना का पर्व श्रावण मास

प्रकृति की उपासना का पर्व श्रावण मास

भोपाल [ महा मीडिया] श्रावण मास (सावन) केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन पर्व है। इस दौरान मानसून की रिमझिम फुहारों से धरती हरी-भरी हो जाती है, वृक्ष पुनर्जीवित होते हैं और संपूर्ण परिवेश में सजीवता एवं उल्लास का अद्भुत सौंदर्य बिखर जाता है। भगवान शिव का स्वरूप ही प्रकृति (बेलपत्र, धतूरा, गंगा, चंद्रमा और सर्प) से गहराई से जुड़ा है। सावन में शिव जी का जलाभिषेक पर्यावरण एवं जल संरक्षण की महत्ता को दर्शाता है। यह मास वृक्षारोपण और मिट्टी की उर्वरता का प्रतीक है। चारों तरफ फैली हरियाली मानव जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करती है। 

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