उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध लोकपर्व हरितालिका तीज

उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध लोकपर्व हरितालिका तीज

मैहर [ महा मीडिया] हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन और रात बिना पानी (निर्जला) और बिना भोजन के रहना होता है। इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। व्रती महिलाएं रात भर सोती नहीं हैं और जागकर भगवान शिव व माता पार्वती के भजन-कीर्तन करती हैं। एक बार यह व्रत शुरू करने के बाद इसे छोड़ा नहीं जाता है; हर साल इसे पूरी निष्ठा से निभाना होता है।यह कठोर तप माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए किया था इसलिए सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह नियम निभाती हैं। इस व्रत को सिर्फ़ इसकी अवधि या समय-सीमा की वजह से ही नहीं बल्कि इस व्रत से जुड़े नियम भी इस व्रत को कठिन बनाते हैं। इस व्रत को करने की विधि में बताया गया है कि इस दिन व्रत करनेवाली महिलाएं सूर्योदय से पहले ही उठ जाएं और नहा धोकर पूरा श्रृंगार करें। पूजा के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी−शंकर की प्रतिमा स्थापित करें और पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करें। सभी नियम के पालन किए बिना व्रत को पूरा नहीं माना जाता है। इस व्रत के दौरान सोने, पानी पीने, कुछ खाने की सख़्त मनाही होती है और अगर कोई भी महिला ऐसा करती है तो वह अगले जन्म में क्या बनेगी उसका उल्लेख हरितालिका तीज़ की कथा में बक़ायदा लिखा गया है जिसे पढ़ना इस व्रत का एक ज़रूरी हिस्सा भी है।सभी  विधियां और विश्वास हैं जिसे हम सालों से बिना सवाल किए बस ढोते-जीते-निभाते और मनाते आए हैं।

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