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राष्ट्रपति मुर्मु ने सराही बस्तर की पारंपरिक न्याय प्रणाली
जगदलपुर(महामीडिया): न्याय के लिए थाने-अदालतों के चक्कर और मुकदमों के निपटारे में दशकों का इंतजार आधुनिक न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौती है। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर के बस्तर दशहरा की परंपरागत मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न्यायलयों-थानों में मुकदमों के निर्णय आने में दस, बीस और तीस साल तक लगने का उल्लेख कर न्याय व्यवस्था की इस चुनौती की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने मांझी से परगना तक फैली विवाद समाधान की परंपरा को आदिवासी समाज के अलिखित संविधान की ताकत के रूप में रेखांकित किया।
बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल होने शुक्रवार को जगदलपुर पहुंचीं राष्ट्रपति ने सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद सिरासार भवन में मुरिया दरबार पहुंचीं, जहां मांझी-चालकियों से उनका संवाद हुआ। पारंपरिक प्रतिनिधियों ने उन्हें मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा, जनजातीय संस्कृति और वनांचल के जीवन के बारे में बताया। राष्ट्रपति ने उनकी बातें सुनीं और इस व्यवस्था से अपने पारिवारिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं भी मांझी की बेटी हूं।”