सुप्रीम कोर्ट ने आज महिला अधिकारों की शब्दावली को अंतिम रूप दिया

सुप्रीम कोर्ट ने आज महिला अधिकारों की शब्दावली को अंतिम रूप दिया

भोपाल [ महा मीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने आज एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि यौन अपराधों से जुड़े निर्णयों में ज्यादा संवेदनशीलता और पीड़ित पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जजों को प्रोसिक्यूट्रिक्स (शिकायतकर्ता महिला), बेबस महिला, पवित्रता खो दी और लज्जा भंग की जैसे शब्दों का उपयोग करने से बचना चाहिए। इसकी जगह अदालतों को विक्टिम (पीड़ित), सर्वाइवर, कंप्लेनेंट, बॉडीली ऑटोनॉमी (शरीर पर अपना अधिकार) और सेक्सुअल असॉल्ट (यौन हमला) जैसे न्यूट्रल शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। यह बात सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट में कही गई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी भाषा पीड़ितों को फिर से सदमे में डाल सकती है और न्याय को बढ़ावा देने के बजाय सामाजिक भेदभाव को और बढ़ा सकती है। साथ ही रिपोर्ट में अदालत की स्पष्ट नीतियों, आसानी से उपलब्ध सहायता प्रणालियों, कलंक को कम करने के लिए जन-जागरूकता अभियानों और लिंग-आधारित व नैतिक टिप्पणियों पर सख्त रोक लगाने की मांग की गई है।

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