महाराष्ट्र के 265 तालुका में सूखा घोषित
तुमसर [ महामीडिया] महाराष्ट्र कम बारिश की वजह से इस बार सूखे की मार झेल रहा है। राज्य का 75 प्रतिशत हिस्सा सूखा घोषित किया गया है किसानों के लिए राज्य सरकार की तरफ से फसल ऋणों का पुनर्गठन, भूमि राजस्व में छूट और कृषि-संबंधी ऋणों की वसूली को टाल दिया गया है। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर विपक्ष ने तीन दिन का विशेष विधानमंडल का अधिवेशन बुलाने की मांग की है ताकि किसानों को राहत देने में किसी तरह की बाधा ना आएं। नागपुर समेत 32 जिले कम बारिश होने की वजह से सूखा घोषित कर दिए गए हैं। राज्य में अपर्याप्त वर्षा के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए 265 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया गया है । इस सूची में शामिल न होने वाले तालुकों का निरीक्षण किया जाएगा और तीसरे चरण के तहत सहायता प्रदान की जाएगी । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया कि सूखे की स्थिति में किसी को भी मदद से वंचित नहीं किया जाएगा । महाराष्ट्र में इस साल औसत से 18.8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। चिंताजनक बात यह है कि मानसून के पीक सीजन के दौरान राज्य के कई हिस्सों में लगातार 21 दिनों से अधिक समय तक सूखा रहा यानि जिस सीजन में राज्य में सबसे ज्यादा बारिश होती थी उस वक्त बारिश नहीं हुई। इस लंबी शुष्क अवधि के कारण खरीफ की फसलें खेतों में ही सूख गईं जिससे कपास, सोयाबीन और दालों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मौसम की मार का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के इलाके इस सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जिसमें नागपुर, यवतमाल, जलगांव, भुसावल समेत कई बड़े जिले शामिल हैं जहां पानी की कमी रहने वाली है। इसके अलावा बीड, धराशिव (उस्मानाबाद), लातूर, नासिक, धुले, सातारा, और संभाजीनगर (औरंगाबाद) के कई हिस्सों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।