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कानूनी सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण कानून से बाहर रहेंगी
भोपाल [ महा मीडिया] आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया है कि अधिवक्ताओं द्वारा दी गई कानूनी सेवाओं में कथित कमी को लेकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि एडवोकेट और क्लाइंट के बीच संबंध "व्यक्तिगत सेवा के अनुबंध " का होता है जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में "सेवा" की परिभाषा से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस सुभेंदु सामंता की खंडपीठ ने एक रिट याचिका खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया । याचिकाकर्ता ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोगों के उन आदेशों को चुनौती दी थी जिनमें एक अधिवक्ता के विरुद्ध दायर उपभोक्ता शिकायत को खारिज कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि वकीलों द्वारा दी जाने वाली कानूनी सेवाओं को 'व्यक्तिगत सेवा' माना जाता है। इसलिए यदि किसी वकील की सेवा में कोई कमी होती है तो उसे लेकर उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती है।