रिजर्व बैंक के नए नियम से बैंकों को चिंता
भोपाल [ महामीडिया]
बैंकों ने रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन पर नई नकद आरक्षित जरूरतों के कारण अन्य ट्रेजरी संचालनों के लिए रुपये की नकदी घटने की आशंका को लेकर चिंता जताई है। बैंकों को विदेशी मु्द्रा जोखिम आरक्षित (एफईआरआर) के प्रारूप के तहत 20 लाख डॉलर से ज्यादा के खास डेरिवेटिव लेन देन के लिए रुपये के मूल्य के 20 प्रतिशत के बराबर नकदी रिजर्व बैंक के पास रखनी होगी। बैंकों ने इसके बजाय ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। बैंकों ने 20 लाख डॉलर की सीमा को हटाने की भी मांग की है। बैंकों ने चेतावनी दी है कि इससे ग्राहक इस आरक्षित जरूरतों से बचने के लिए बड़े हेजिंग लेन देन को छोटे-छोटे सौदों में बांट सकते हैं। बैंकों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल होगा। स्टेट बैंक के अनुसार इस आरक्षित जरूरत के साथ अन्य उपायों के कारण बैंकिंग प्रणाली से दीर्घावधि के लिए एक लाख करोड़ रुपये की निकासी हो सकती है।