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भावातीत ध्यान से ही विश्व शांति संभव : ब्रह्मचारी गिरीश जी
भोपाल [ महा मीडिया] विश्व शांति दिवस के उपलक्ष पर आज महर्षि संस्थान के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों एवं महर्षि स्कूल के छात्र-छात्राओं को विश्व शांति की शपथ दिलवाते हुए महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख एवं महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि यदि हमारा मन शांत है तो शांति और समृद्धि अपने आप परिलक्षित होने लगती है। मन को शांत रखने के लिए परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने अत्यंत सहज एवं सरल तकनीकी भावातीत ध्यान शैली के माध्यम से पूरे विश्व को प्रदान की है। इसके सुबह एवं शाम प्रतिदिन नियमित अभ्यास से चेतना शुद्ध होती है और उस स्तर से काम करने पर प्रकृति के समस्त नियम हमारी सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि नियमित भावातीत ध्यान से ही समूचे विश्व में शांति संभव होगी। उनका कहना था कि
साधना का यह कम रुकना नहीं चाहिए भले ही कितने ही व्यवधान आ जाएं। हमारा मानना है कि आप सब लोग नियमित भावातीत ध्यान के अभ्यास से शुद्ध चेतना विकसित करें एवं पूरे विश्व में शांति के वाहक बनें। संबोधन के पश्चात ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त लोगों को विश्व शांति की शपथ दिलवाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के निदेशक संचार एवं जनसंपर्क विजय रत्न खरे ने महर्षि विश्व शांति आंदोलन के बारे में बताया। इसके पश्चात पूर्व कुलगुरु प्रो. भुवनेश शर्मा ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह की एक बालक एवं एक बालिका ने भी विश्व शांति दिवस पर अपने विचार साझा किए। इसके पश्चात समस्त उपस्थित लोगों ने सामूहिक भावातीत ध्यान का अभ्यास किया। कार्यक्रम के अंत में महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह की संयुक्त निदेशिका श्रीमती आर्या नंद कुमार ने सभी का आभार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी को प्रसाद का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन महर्षि सेंटर फॉर एजुकेशनल एक्सीलेंस,सभागार, लांबाखेड़ा स्थित भोपाल में किया गया था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महर्षि संस्थान के अधिकारियों,कर्मचारियों सहित शिक्षक,शिक्षिकाएं एवं विभिन्न महर्षि विद्या मंदिर विद्यालयों के छात्र एवं छात्राएं उपस्थित थे।
विश्व शांति दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि संस्थान की परंपरा अनुसार गुरु परंपरा पूजन से प्रारंभ हुआ था।