पितृपक्ष का पांचवा दिन कुंवारा पंचमी

पितृपक्ष का पांचवा दिन कुंवारा पंचमी

मुंबई [महा मीडिया] 

 

एक अक्टूबर को पितृपक्ष का पांचवा दिन है। पितृपक्ष की पंचमी तिथि को कुंवारा पंचमी कहा जाता है, जो अविवाहित मृत परिजनों को समर्पित होती है।  इसे कुंवारा पंचमी भी कहा जाता है। इस दिन उन लड़के-लड़कियों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु शादी होने से पहले ही हो गई थी। साथ ही, इस दिन उन पितरों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की पंचमी तिथि को हुई थी। सनातन परंपरा में 16 संस्कारों में विवाह को महत्वपूर्ण माना गया है। जिन लोगों की मृत्यु शादी से पहले हो जाती है, उनका 'सपिण्डीकरण संस्कार' नहीं होता। यानी, पितरों की मुख्य कतार में मिलाने की प्रक्रिया। शास्त्रों ने पितृपक्ष की पंचमी को ऐसे अविवाहित दिवंगतों के उद्धार और शांति के लिए तय किया है। इस दिन दोपहर में परिवार का मुखिया दक्षिण दिशा में मुख करके कुशा, जल और काले तिल से तर्पण करता है, एक पिण्ड का दान करता है, पंचबलि (गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटी का हिस्सा) निकालता है और एक ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर दक्षिणा देता है।

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