महर्षि निमि से श्राद्ध की परंपरा
भोपाल [ महामीडिया] अभी पितृ पक्ष चल रहा है और आज चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष 10 अक्टूबर तक है। इन दिनों में पितरों को याद करने और उनके लिए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। पितृ पक्ष में किए जाने वाले धर्म-कर्म और नियमों के बारे में कई ग्रंथों में जिक्र किया गया है। महाभारत में भी श्राद्ध कर्म से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर से कहा कि श्राद्ध की कथा महर्षि निमि से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार ब्रह्मा जी से अत्रि मुनि की उत्पत्ति हुई। अत्रि मुनि के यहां भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ और उनके वंश में आगे चलकर निमि ऋषि हुए। निमि ऋषि के पुत्र का नाम श्रीमान था। कम उम्र में ही श्रीमान की मृत्यु हो गई। पुत्र की मृत्यु से निमि ऋषि बहुत दुखी हुए। इसी दुख में उन्होंने एक अमावस्या तिथि पर अपने पुत्र के लिए श्राद्ध कर्म किया। उन्होंने ब्राह्मणों को भोजन कराया और पुत्र के लिए पिंडदान किया। धार्मिक परंपरा में इसी घटना को श्राद्ध कर्म की शुरुआत के रूप में बताया जाता है। इसके बाद पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा आगे बढ़ी। श्राद्ध अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की एक पवित्र परंपरा है।