नवीनतम
गणेश उत्सव का अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी कल
नई दिल्ली (महामीडिया): गणेश उत्सव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। गणेश जी के भक्त अनंत चतुर्दशी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके उनकी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। इस बार गणेश उत्सव का समापन कल यानी शुक्रवार, 25 सितंबर को होगा। इस दिन श्रद्धालु गणपति बप्पा को विदाई देंगे।
कई लोग गणेश प्रतिमा का विसर्जन नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों में करते हैं, हालांकि, मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी आसानी से किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी घर में विसर्जन करना लाभदायक है। इससे जलस्रोतों में प्रतिमा, फूल-माला और पूजन सामग्री जाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, घर में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए किसी साफ और बड़े बर्तन में पानी भरना चाहिए। पूजा के बाद प्रतिमा को इसी बर्तन में विसर्जित किया जा सकता है। जब मिट्टी की प्रतिमा पूरी तरह पानी में घुल जाए, तब उस मिट्टी और पानी को घर के आसपास पौधों या घर के गमलों में डाल सकते हैं।
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने से पहले उनकी पूजा पूरे श्रद्धाभाव से करनी चाहिए। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद घर में पूजा स्थल को साफ करें। गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा पर सबसे पहले जल, दूध और पंचामृत का छिड़काव करें। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाया जाता है। पंचामृत का छिड़काव करते समय मन ऐसा भाव रखें, जैसे हम भगवान का अभिषेक कर रहे हैं। ज्यादा जल, दूध और पंचामृत चढ़ाने से प्रतिमा गल सकती है, इसलिए इन तरल चीजों का प्रतिमा पर छिड़काव ही करना चाहिए।
भगवान को जनेऊ अर्पित करें। पूजा में चंदन, सिंदूर, अबीर, गुलाल, इत्र और चावल चढ़ाएं। गणेश जी को दूर्वा विशेष प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में दूर्वा अवश्य अर्पित करें।
मान्यता है कि गणेश जी को मंत्रों का जाप करते हुए दूर्वा की 21 गांठें चढ़ानी चाहिए। इसके बाद भगवान को लड्डुओं का भोग लगाएं। पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य फल और प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं।
पूजा पूरी होने के बाद कर्पूर जलाकर भगवान गणेश की आरती करें। आरती के बाद हाथ जोड़कर भगवान से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें और अन्य लोगों में भी प्रसाद वितरित करें। इसके बाद गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना चाहिए।