चीन ने बड़ी मशीनों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाए

चीन ने बड़ी मशीनों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाए

मुंबई [महामीडिया] 

चीन अपनी फैक्ट्रियों और प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाली चीजों के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ा रहा है। पिछले एक महीने में उसने ड्रोन, AI मॉडल और एजेंट, नई दवाएं बनाने की तकनीक और सोलर पैनल बनाने की कुछ प्रक्रियाओं पर निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं या उन्हें अपने नियंत्रण में लेने के कदम उठाए हैं। इसमें बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (5,000 टन क्षमता वाली मशीनें), ऊंचाई वाले इलाकों में कंक्रीट का छिड़काव करने वाली मशीनें (वेट शॉक्रेट मशीनें) और वॉकिंग एक्सवेटर शामिल हैं। इसका असर भारत के अलावा अमेरिका और दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। चीन के नए नियमों से सोलर उपकरण बनाने वाली फैक्ट्रियां लगाना मुश्किल हो सकता है। दुनिया में गिनी-चुनी कंपनियां ही मशीनें बनाती हैं। इनमें से ज्यादातर की फैक्ट्रियां चीन में हैं। भारत भी हिमालय में सुरंग बनाने के लिए इनका उपयोग करता है। इनसे सेना को चीन से लगी सीमा तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है लेकिन अब भारत के लिए ये मशीनें खरीदना मुश्किल हो सकता है। चीन तय कर सकता है कि उसकी फैक्ट्रियों में बनी मशीनें भारत को बेची जाएंगी या नहीं। भारत, अमेरिका, यूरोप और जापान अब इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में भी सड़क परिवहन मंत्री कंपनियों से देश में ही सुरंग खोदने वाली मशीनें बनाने की अपील कर चुके हैं। यूरोप और जापान भी एंटीबायोटिक और दूसरी दवाओं के जरूरी तत्वों के लिए चीन पर निर्भरता घटाना चाहते हैं।अमेरिका अपने यहां दुर्लभ खनिजों की खुदाई और उन्हें इस्तेमाल लायक बनाने का काम दोबारा शुरू करना चाहता है। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक तकनीक और हथियार बनाने में होता है।

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