कंपनियों को बंद करने के आवेदन 15 सितंबर तक स्वीकार्य होंगे
भोपाल [ महा मीडिया] म.प्र. में कारोबार बंद कर चुकी कंपनियों को कानूनी रूप से रिकॉर्ड से बाहर निकलने का मौका देने वाली कंपनी अनुपालन सुविधा योजना के तहत क्लोजर की रफ्तार धीमी है। प्रदेश में 76,749 पंजीकृत कंपनियों में से अब तक सिर्फ 278 कंपनियों ने क्लोजर का विकल्प चुना है। केंद्र सरकार की योजना के तहत आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर निर्धारित है। इसके बाद लंबित अनुपालन और दंड का बोझ कंपनियों पर बढ़ सकता है।15 अप्रैल से शुरू हुई योजना में सरकार ने निष्क्रिय या बंद कंपनियों के लिए दो प्रमुख राहत दी हैं। पहली वर्षों से लंबित दस्तावेजों को कम अतिरिक्त शुल्क के साथ नियमित कराने का अवसर और दूसरी पूरी तरह बंद हो चुकी कंपनियों को कॉरपोरेट मंत्रालय के रिकॉर्ड से विधिवत बाहर निकलने का रास्ता। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच देशभर में 12,558 कंपनियों का विधिवत क्लोजर हो चुका है। इनमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी महज 2.21 प्रतिशत है। महाराष्ट्र 2,482 क्लोजर के साथ सबसे आगे है। दिल्ली में 2,207, कर्नाटक में 834, उत्तर प्रदेश में 718 और राजस्थान में 394 कंपनियों ने क्लोजर का विकल्प चुना है। मध्यप्रदेश 278 क्लोजर के साथ इन राज्यों से काफी पीछे है। देश में क्लोजर कराने वाली कंपनियों के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। वहां 2,482 कंपनियों ने योजना के तहत समापन कराया है, जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा केवल 278 है।