गोटमार मेले में कई लोग घायल
भोपाल [ महा मीडिया] पांढुर्णा गोटमार मेले के दौरान जाम नदी में पत्थरबाजी जारी है। झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के खिलाड़ी आमने-सामने हैं। पत्थर लगने से करीब 118 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों के सिर फूट गए। 4 खिलाड़ियों को गंभीर चोट आई है। यह परंपरा करीब 400 साल पुरानी है। हालांकि इसका सटीक इतिहास स्पष्ट नहीं है लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार पत्थरबाजी में पहली मौत 1955 में हुई थी। इसके बाद से 2025 तक कुल 13 लोगों की जान जा चुकी है जिनमें एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं। इतिहास में ऐसे कई मौके आए जब इस मेले को रोकने के प्रयास किए गए जो हिंसक हो उठे। 3 सितंबर 1978 और 27 अगस्त 1987 को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और अंततः फायरिंग करनी पड़ी थी। नदी के बीच में पलाश का एक पेड़ (झंडा) गाड़ा जाता है। पांढुर्णा के लोग पत्थरबाजी के बीच उस झंडे को निकालकर माँ चंडिका के मंदिर में अर्पित करते हैं।यह खूनी खेल लगभग 300 से 400 साल पुराना माना जाता है जिसकी शुरुआत एक प्रेमी जोड़े की कथा से जुड़ी है।प्रशासन द्वारा एम्बुलेंस, डॉक्टर और भारी पुलिस बल तैनात किए गए हैं।