गूगल के भारतीय डेटा सेंटर परियोजना पर संकट के बादल

गूगल के भारतीय डेटा सेंटर परियोजना पर संकट के बादल

भोपाल [महा मीडिया] 

गूगल भारत में अपना एक बहुत बड़ा डेटा सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है जिसमें 15 अरब डॉलर का निवेश होना है। इसके लिए आंध्र प्रदेश में पहाड़ियों को काटकर उन्हें सीढ़ीदार बनाया जा रहा है ताकि काम शुरू हो सके। लेकिन अब इस परियोजना को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे आसपास के जंगल और वन्यजीवों को नुकसान होगा और भारी मात्रा में पानी की खपत से इलाके में पानी का संकट पैदा हो सकता है। इसी विरोध के चलते गूगल की इस बड़ी परियोजना अब कानूनी मुश्किलों में फंस गई है। विशाखापत्तनम शहर को अपने जलाशयों और नदियों से रोज़ाना 410 मिलियन लीटर पानी मिलता है जबकि ज़रूरत 480 मिलियन लीटर की है। 25 लाख की आबादी वाले इस शहर में पानी की राशनिंग आम बात है। दुनिया भर में तेज़ी से बन रहे डेटा सेंटरों का विरोध हो रहा है क्योंकि इनमें सर्वर को ठंडा रखने के लिए बहुत अधिक पानी और बिजली का उपयोग होता है। भारत जैसे विकासशील देश में इसका असर और भी अधिक हो सकता है। गूगल का कहना है कि परियोजना में उन्नत क्लोज-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम का उपयोग होगा आवासीय या ग्रामीण इलाकों के पानी का डायवर्जन नहीं किया जाएगा और पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।

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