आइये जानते हैं अमेरिका का अनुच्छेद 301
भोपाल [महा मीडिया]
अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों के सामान पर अनुच्छेद 301 के तहत नया टैरिफ लगा दिया है। भारत के लिए राहत की बात यह रही कि पहले 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात थी लेकिन आखिर में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इसकी एक बड़ी वजह यह रही कि भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगा दी। असली सवाल सिर्फ 10 प्रतिशत टैरिफ का नहीं है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका अब अनुच्छेद 301 का उपयोग सिर्फ व्यापारिक नियम लागू करने के लिए कर रहा है या फिर यह दूसरे देशों पर दबाव बनाने का नया तरीका बन चुका है ? अनुच्छेद 301 अब अमेरिका के सबसे ताकतवर व्यापारिक हथियारों में शामिल हो चुका है। पहले इसका उद्देश्य दूसरे देशों की कथित गलत व्यापारिक नीतियों के विरुद्ध कार्रवाई करना था। लेकिन अब अमेरिका इसका उपयोग सिर्फ टैरिफ लगाने के लिए नहीं बल्कि दूसरे देशों की नीतियों को प्रभावित करने के लिए भी कर रहा है। अमेरिका पहले डिजिटल टैक्स, ई-कॉमर्स, बौद्धिक संपदा अधिकार, मेडिकल डिवाइस की कीमतों और कृषि बाजार जैसे कई मुद्दों पर अनुच्छेद 301 के जरिए दबाव बना चुका है। सेक्शन 301 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम का एक प्रावधान है। यह अमेरिकी सरकार (विशेषकर USTR) को अनुचित व्यापार नीतियों या जबरन मजदूरी का हवाला देकर भारत और चीन समेत कई देशों के आयात पर टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की कानूनी शक्ति देता है। यह कानूनअमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेशी सरकारों की उन नीतियों की जांच करने की अनुमति देता है जो अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचाती हैं।