नवरात्रि  का ‘पसंदीदा फलाहार’ साबूदाना खिचड़ी

नवरात्रि  का ‘पसंदीदा फलाहार’ साबूदाना खिचड़ी

भोपाल [महामीडिया]आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। कई लोग 9 दिनों का व्रत रखते हैं। इस दौरान रसोई में एक चीज की एंट्री लगभग तय होती है वह है साबूदाना। व्रत रखने वाले लोग कभी खिचड़ी, कभी वड़ा तो कभी खीर के रूप में इसे बड़े चाव से खाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस साबूदाने को हम पारंपरिक फलाहार मानते हैं केरलम भीषण फूड क्राइसिस से जूझ रहा था तब वहां के शासकों ने लोगों को एक नई कंद फसल खाने के लिए प्रोत्साहित किया जिसे हम ‘टैपिओका’ या ‘कसावा’ के नाम से जानते हैं। शुरुआत में लोग साबूदाना को खाने से डरते थे। कहा जाता है कि उस समय के महाराजा विशाखम तिरुनाल ने खुद इसे खाकर लोगों को भरोसा दिलाया। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि साबूदाना लंबे समय से व्रत-उपवास की परंपरा का हिस्सा रहा है। यह व्रत में खाने के लिए ‘मान्य’ है। इससे खिचड़ी, खीर, वड़ा जैसे कई व्यंजन आसानी से बनाए जाते हैं। साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है। इसमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है जबकि प्रोटीन, फैट और फाइबर बहुत कम होते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर को जल्दी एनर्जी देता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ज्यादा खाने पर कैलोरी इनटेक भी बढ़ सकता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व न के बराबर होते हैं साबूदाना व्रत का हिस्सा हो सकता है लेकिन पूरे व्रत का आधार नहीं होना चाहिए। क्यूंकि व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा के साथ-साथ प्रोटीन, अच्छे फैट, विटामिन और मिनरल्स की भी जरूरत होती है।

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