करवाचौथ में सरगी की थाली का विधान
भोपाल [ महामीडिया] करवा चौथ पर सरगी की थाली सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में, करीब 3 से 4 बजे के बीच) खाई जाती है जिसे सास अपनी बहू को देती हैं। इस थाली को ऐसा तैयार करें ताकि दिनभर निर्जला (बिना पानी और अन्न) व्रत रखने के लिए शरीर में ऊर्जा और हाइड्रेशन बना रहे। करवाचौथ पूजा की थाली सजाते समय कुछ जरूरी पूजन सामग्री का ध्यान रखना चाहिए। थाली में सबसे पहले आटे या मिट्टी का दीपक रखें जिसमें तेल और बाती डालकर चंद्रमा और पति की आरती उतारी जाती है। मान्यता के अनुसार 11 या 14 कांस की तीलियां रख सकते हैं। पूजा के लिए मिट्टी का करवा, छलनी, सिंदूर, रोली, चावल और चंदन भी जरूर शामिल करें। चंद्रदेव को भोग लगाने के लिए मिठाई, दूध से बनी चीजें, फल और मेवे रखें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए पीतल का लोटा रखें इसके अलावा पानी से भरा गिलास भी थाली में रखें जिससे पति व्रत का पारण कराते हैं। पूजा में अर्पित करने के लिए फूल और माला रखना भी न भूलें। करवा चौथ पर सरगी की थाली में दूध-फेनी (सेवइयां), ताजे फल (जैसे केला, सेब, अनार), सूखे मेवे (बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट), मिठाई, मठरी और सास की तरफ से दिए जाने वाले नए वस्त्र, सिंदूर व शगुन की चीजें शामिल की जाती हैं।