हिंदू और बौद्ध धर्म की एकजुटता का प्रमाण दार्जिलिंग का महाकाल मंदिर
भोपाल [ महा मीडिया]
भारत के पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में 'चौरास्ता स्कवायर' या 'द मॉल' के पास एक पहाड़ी पर बसा है देश का एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां हिंदू और बौद्ध धर्म की एकजुटता और प्रेम भावना साफ-साफ देखने को मिलती है।इस पहाड़ी पर बसा 'दार्जिलिंग का महाकाल मंदिर' जहां भगवान शिव के साथ-साथ गौतम बुद्ध को भी पूजा जाता है।महाकाल मंदिर वेधशाला पहाड़ी पर स्थित है। बौद्ध और हिंदू पुजारियों और उपासकों के लिए यह मंदिर अत्यंत खास महत्व रखता है। दोनों ही संस्कृतियों का एक सुंदर मिश्रण महाकाल मंदिर आज इमारत के रूप में उस स्थान पर स्थित है जहां कभी 'दोरजे लिंग' के नाम से एक बौद्ध मठ हुआ करता था। पौराणिक किंवदंतियां कहती हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन शिव-लिंग साल 1782 में यहां प्रकट हुए थे और इस तरह दार्जिलिंग को महाकाल मंदिर का सौभाग्य प्राप्त हुआ।दार्जिलिंग में महाकाल मंदिर ऑब्जर्वेटरी पहाड़ पर बसा है, जहां से पूरे शहर का सुंदर और आकर्षक नजारा साफ-साफ देखा जा सकता है। भगवान शिव यहां के प्रमुख देवता हैं। बौद्ध मठ होने के कारण यह जगह हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। इस मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में भगवान शिव (स्वयंभू तीन शिवलिंग जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के प्रतीक हैं) के साथ-साथ भगवान बुद्ध की मूर्तियां भी सुशोभित हैं। यहां हिंदू पुजारी और तिब्बती बौद्ध भिक्षु (काग्यू संप्रदाय से जुड़े) दोनों ही अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार करते हैं। मंदिर के बाहर हिंदू घंटियों के साथ-साथ बौद्ध धर्म के रंग-बिरंगे प्रार्थना ध्वज और पवित्र चोर्टेन लहराते हैं।